लखनऊ, अगस्त 14 -- Lucknow Highcourt: इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने कहा है कि संतान न होने को लेकर कहासुनी के दौरान पति द्वारा पत्नी को 'बांझ' (निसंतान) कहना, अपने आप में भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए के तहत क्रूरता का अपराध नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल की पीठ ने हिरेंद्र कुशवाहा की याचिका स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए (पति या रिश्तेदारों द्वारा विवाहिता के साथ क्रूरता), धारा 323 (स्‍वेच्‍छा से चोट पहुंचाना), धारा 504 (जानबूझकर अपमान करना) व धारा 506 (आपराधिक धमकी) तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धाराओं 3/4 के तहत चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। मामला लखनऊ के गाजीपुर थाने से संबंधित था। पीठ ने कहा कि आरोपों को प्रथम दृष्टया सही मानने पर भी यह मामला मुख्य रूप से संतान न होने से...