संघर्ष के निशान नहीं तो दुष्कर्म पीड़िता की गवाही खारिज नहीं : हाईकोर्ट
रांची, अक्टूबर 8 -- रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि दुष्कर्म पीड़िता के शरीर पर संघर्ष या प्रतिरोध के निशान नहीं मिलना मात्र उसकी गवाही को खारिज करने का आधार नहीं हो सकता। खासकर तब, जब पीड़िता नाबालिग हो और मेडिकल जांच से घटना की पुष्टि होती हो। जस्टिस आनंद सेन और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने सिमडेगा की विशेष पॉक्सो अदालत के आरोपियों की 20 साल कैद की सजा को बरकरार रखते हुए तीनों आरोपियों की अपील खारिज कर दी। घटना सिमडेगा में वर्ष 2017 में हुई थी। जलडेगा थाना में इसकी प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी। पीड़िता की उम्र घटना के समय करीब 16 वर्ष थी। वह सुरेश सामद के घर आयोजित एक कार्यक्रम में गई थी। रात करीब 10 बजे वह हाथ-पैर धोने के लिए चापाकल के पास गई। आरोपियों ने उसे पकड़ लिया। आरोप है कि एक आरोप...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.