मुंगेर, फरवरी 11 -- जमालपुर, एक प्रतिनिधि। श्री श्री 108 योग माया बड़ी दुर्गा स्थान परिसर में चल रहे संगीतमय शिव महापुराण कथा की पांचवें दिन हरिद्वार से आए कथा वाचक ज्योतिर्मयानंद जी महाराज ने कुमार जन्म , गणेशोत्सव , गणेश विवाह, कुमार चरित्र आदि का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि शिव महापुराण के दौरान बालक गणेश की चर्चा का होना भी उतना ही अनिवार्य है जितना की सिर्फ महापुराण की कथा का करना होता है। जिस प्रकार माता पार्वती के स्नान के पूर्व अपने शरीर पर मिट्टी चंदन के का निर्माण कर उसमें प्राण प्रतिष्ठा दाल एक बालक का निर्माण किया गया। बालक गणेश के द्वारा द्वार पर पहरा देने पर पिता शंकर के ओर से क्रोध में उनका सिर काटना और ठीक उसके उपरांत माता पार्वती की व्यथा को सुन हाथी का सर लगा उन्हें पूर्ण जीवित करना। इसके उपरांत प्रथम पूज्य होने का आशी...