संवाददाता, जनवरी 4 -- मां गंगा की गोदी में सबकी अपनी कामना, सबका अपना भक्ति-भाव। तंबुओं की नगरी में टेंट की बनी एक छोटी सी कुटिया, जिसमें सीमित सामग्री में सिमटी सकल गृहस्थी। शयन के लिए एक कोने में जमीन पर बिछा पुआल, दूसरे कोने में रसोई और एक कोने में चौकी पर विराजित रामचरित मानस, शंख और भगवान विष्णु का आसान। न कोई सांसारिक मोह-माया न ही कोई खेती-पाती की चिंता। अभिलाषा यही कि जब तक शरीर साथ दे पतित पावनी मां गंगा के निमित्त जीवन समर्पित रहे। जीवन-मृत्यु के बंधन से मुक्ति मिले। इसी भक्ति-भाव और अक्षय पुण्य की कामना के साथ माघ मास के पहले स्नान पर्व पर शनिवार को लगभग पांच लाख श्रद्धालुओं ने कल्पवास का संकल्प लिया। ब्रह्ममुहूर्त में गंगा स्नान कर कल्पवासियों ने मां गंगा का पूजन किया। घाट पर दीप, फल, पुष्प, मिष्ठान, नैवेद्य अर्पित कर संकल्प प...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.