मुजफ्फर नगर, मई 10 -- मुजफ्फरनगर। गांधीनगर स्थित श्री श्यामाश्याम मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथावाचक पं.गंगोत्री तिवारी ने श्रीकृष्ण-सुदामा मित्रता का जीवंत वर्णन किया। उन्होंने कहा मित्रता निस्वार्थ प्रेम, समानता और अटूट विश्वास का सर्वोच्च प्रतीक है। कथावाचक ने बताया कि सुदामा द्वारा बाल्यकाल में कृष्ण के हिस्से के चने खाने के कारण उन्हें दरिद्रता का सामना करना पड़ा, क्योंकि किसी के हिस्से का धन रखना अंतत: कष्टकारी होता है। प्रसंग के दौरान जब द्वारिकाधीश श्रीकृष्ण ने अपने दरिद्र मित्र सुदामा का नाम सुना, तो वे नंगे पैर उन्हें लेने दौड़ पड़े। भगवान ने सुदामा को सिंहासन पर बैठाकर उनके चरण धोए और भेंट में लाए तंदुल (चावल) खाकर उन्हें दो लोकों का राज्य दे दिया। यह भी पढ़ें- कथा में सुदामा चरित्र का प्रसंग सुनाया कथा में मुख्य र...