कोडरमा, मार्च 18 -- झुमरी तिलैया निज प्रतिनिधि। सात दिवसीय श्रीराम कथा के छठे दिन सुंदरकांड का भावपूर्ण प्रसंग प्रस्तुत किया गया। कथा वाचक आचार्य पंडित रामकरण सहल ने भगवान श्रीराम, जानकी नंदन व करुणा के सागर दशरथ नंदन के चरणों में नमन करते हुए कथा का आरंभ किया। उन्होंने कहा कि भक्त के बिना भगवान भी अधूरे हैं, ठीक उसी प्रकार श्रोताओं के बिना कथा वाचक भी अधूरा होता है। कथा के दौरान आचार्य जी ने राजा जनक के समय पड़े अकाल का मार्मिक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि जब जनकपुर क्षेत्र में भयंकर अकाल पड़ा और वर्षा नहीं हो रही थी, तब एक संत ने सुझाव दिया कि यदि कोई रानी अपने केशों का त्याग करे तो वर्षा हो सकती है। इस पर महाराजा जनक ने यह संदेश अयोध्या के राजा दशरथ को भेजा। राजा दशरथ ने अपनी रानियों को यह संदेश सुनाया, लेकिन विशेष कारणों से वे स्व...
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