शामली, मई 19 -- कैराना। श्री बाबा बनखंडी महादेव मन्दिर मे चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस की कथा में स्वामी तेजस्वी दास ने बताया कि श्री कृष्ण परम ब्रह्म परमेश्वर है। उन्होंने बताया कि श्री कृष्ण नराकृति जरूर है पर नर नहीं है। हम मनुष्यों का शरीर पंच भौतिक है, जो पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश तत्व से बना है। मनुष्य शरीर नाशवान है परंतु भगवान का शरीर सच्चिदानंद है। सत् चित आनंद, यह दिव्य चिन्मय है। उन्होंने बताया कि सत् का अर्थ है शाश्वत जो हमेशा से था है और हमेशा रहेगा। चित का अर्थ है ज्ञान जो सर्वज्ञ है, भूत वर्तमान व भविष्य को जानने वाला और आनंद दिव्य निरंतर परिपूर्ण मात्रा में है। यह भी पढ़ें- भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन श्री कृष्ण सर्व कारण कारणम है। आध्यात्मिक जगत व भौतिक जगत के कारण भी श्री कृष्ण ही है। उनक...