बलिया, मार्च 24 -- रतसर। नगर के हरिराम ब्राह्म स्थान पर चल रही रामकथा के पांचवें दिन पं. गणेश महाराज ने श्रद्धालुओं को बताया कि श्रीराम के आदर्शों और संस्कारों को जीवन में उतारने पर ही कथा श्रवण की वास्तविक सार्थकता पूर्ण होगी। उन्होंने लक्ष्मण का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार उन्होंने अपने बड़े भाई श्रीराम को पिता समान और मां जगत जननी सीता को माता के रूप में सम्मान दिया। वर्तमान में समाज के लोग इस आदर्श को अपने जीवन में उतारें तो समाज में आपसी भाईचारा और प्रेम प्रगाढ़ होगा। उन्होंने बताया कि जाति-पात का भेद करने वालों को श्रीराम और शबरी प्रसंग से सीख लेनी चाहिए। हम सभी एक ही ईश्वर के अंश हैं, ऐसे में किसी से भेद नहीं करना चाहिए।

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