रांची, जून 29 -- रांची, प्रमुख संवाददाता। जैन मुनि सुयश सागर महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम और महाबली हनुमान का आदर्श चरित्र केवल पढ़ने या सुनने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में पूरी तरह उतारने के लिए है। जैन पद्मपुराण के अनुसार, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन न्याय, त्याग और परम कर्तव्यपरायणता का साक्षात स्वरूप है, उन्होंने महलों के सुख को त्याग कर धर्म की रक्षा की। वहीं दूसरी ओर, हनुमान जी असीम शक्ति के धनी होने के बावजूद पूरी तरह निरहंकारी और समर्पित थे। जैन मुनि सोमवार को अपर बाजार स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा में प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हनुमान जी का चरित्र हमें सिखाता है कि शक्ति का उपयोग हमेशा धर्म और सेवा के कार्यों में होना चाहिए, अहंकार में नहीं। प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए मुनि श्री ने वर्तमान समाज की स्थ...