औरैया, जून 30 -- अछल्दा विकासखंड क्षेत्र के ग्राम रुरुकलां में चल रही श्रीराम कथा के छठे दिन राम वनगमन प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा के दौरान कथावाचक ने भगवान श्रीराम के जीवन से त्याग, मर्यादा और पारिवारिक मूल्यों का संदेश देते हुए आपसी प्रेम और सम्मान बनाए रखने का आह्वान किया। कथावाचक आचार्य पं. जगमोहन त्रिपाठी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम केवल अयोध्या के राजकुमार नहीं, बल्कि मर्यादा, त्याग और आदर्श जीवन के प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि अयोध्या में श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन मंथरा के बहकावे में आकर कैकेयी ने राजा दशरथ से भरत को राज्य और श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांग लिया। पिता के वचन की रक्षा के लिए श्रीराम ने बिना किसी विरोध के वनगमन स्वीकार किया। माता सीता और भ्राता लक्ष...