बोकारो, जुलाई 18 -- चीरा चास स्थित मां करूणानन्दोमयी मंदिर प्रांगण में आयोजित श्रीराम कथा एवं महायज्ञ के तीसरे दिन श्रीधाम अयोध्या से पधारे श्रीराम कथा वाचक एवं श्री सत्यम पीठाधीश्वर नरहरि दास महाराज ने श्रद्धालुओं को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की दिव्य कथा सुनाई। रथ यात्रा के उपलक्ष्य में आयोजित कथा में उन्होंने सीताराम विवाह की पारंपरिक विधियों का वर्णन करते हुए लक्ष्मी-नारायण तथा गौरी-शंकर विवाह की परंपराओं से उसका संबंध बताया। कथा के दौरान महाराज ने गुरु की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कन्यादान के बाद वर-वधु गुरुदेव की आज्ञा मिलने तक एक साथ आसन ग्रहण नहीं करते। उन्होंने कहा कि स्वयं परमात्मा भी गुरुदेव की आज्ञा का पालन करते हैं, इसलिए जीवन में गुरु का स्थान सर्वोच्च है।

यज्ञ और भजन कथा से पूर्व भगवान जगन्नाथ के भजनों पर श्...