छपरा, जनवरी 1 -- बनियापुर, एक प्रतिनिधि। प्रखंड के चेतन छपरा मोड़ पर चल रहे श्रीरामचरितमानस नवाह्नपाठ यज्ञ के पांचवें दिन श्रीअवध धाम से पधारे संत श्रीशुभमजी महाराज ने कहा कि राम हर वर्ग को साथ लेकर चलने वाले राजा थे। उन्होंने जाति या कुल में भेद नहीं किया। वन में शबरी के बेर प्रेम से खाए। इस प्रकार उन्होंने यह दिखाया कि प्रेम और भक्ति जाति से ऊपर है। निषादराज को गले लगाकर मित्रता को जन्म से नहीं भावना से परिभाषित किया। राजमहल के राजकुमार होते हुए राम ने कभी वैभव का गर्व नहीं किया। वन में साधु, वानर, निषाद सबके साथ समान भाव से बैठे और भोजन किया। राज्याभिषेक के बाद भी उन्होंने सरलता नहीं छोड़ी। प्रजा से सीधे संवाद किया। राजा होकर भी वे अपने जनों के बीच साधारण मनुष्य से रहे। उनका जीवन त्याग का रहा। लंका विजय के बाद राम ने धन और संपत्ति पर क...