रामपुर, मार्च 15 -- हरे राम हरे कृष्ण निष्काम अखंड संकीर्तन परिवार के तत्वावधान में ठाकुरद्वारा मुनीश्वर दत्त जी मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास आचार्य गोविंदाचार्य महाराज ने भक्तों को ध्रुव चरित्र का भावपूर्ण वर्णन सुनाया। कहा कि बालक ध्रुव राजा उत्तानपाद के पुत्र थे और उनकी माता का नाम सुनीति था। एक दिन जब ध्रुव राजा उत्तानपाद की गोद में जाकर बैठ गए, तब उनकी सौतेली माता सुरुचि ने ध्रुव को राजा की गोद से उतार दिया। सुरुचि ने कटु वचन कहते हुए कहा कि राजा की गोद में बैठने का सौभाग्य तुम्हें तभी प्राप्त होगा, जब तुम मेरी कोख से जन्म लोगे। इसके लिए तुम्हें जंगल में जाकर तपस्या करनी होगी। अपनी माता सुनीति के अच्छे संस्कारों के कारण, ध्रुव ने हार मानने के बजाय मधुवन के जंगल में जाकर कठोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर भ...