मुजफ्फरपुर, जनवरी 19 -- गायघाट,एक संवाददाता। जारंग बुढ़िया माई स्थान मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन सोमवार को पंडित मनीष पराशर महाराज ने श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह का प्रसंग सुनाया। कथावाचक ने कहा कि जब द्वार पर संत का आगमन हो तो यह नहीं पूछा जाना चाहिए कि वे किस उद्देश्य से आए हैं, बल्कि उनका आदर-सम्मान करते हुए सर्वप्रथम जलपान आदि की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कृष्ण और गोपियों के प्रेम-प्रसंग का उल्लेख करते हुए श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। कथा के दौरान उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि सुंदरता पर मोहित होने के बजाय उस सुंदरता को रचने वाले ईश्वर का स्मरण और गुणगान करना चाहिए। युवाओं से कहा कि मोबाइल में रील नहीं बनाकर भगवान की कथा में तन्मय होकर भक्ति भाव से जुड़ना चाहिए। तीर्थ यात्रा के महत...