गोड्डा, अगस्त 23 -- मेहरमा, एक संवाददाता। श्रवण अर्थात सुनना। पवित्र सावन माह में प्राचीन काल से ही वेद सुनने और सुनाने की परिपाटी रही है।वेद विद धातु से बना है, जिसका अर्थ ज्ञान होता है। वेद सुनने और सुनाने से ज्ञान की वृद्धि होती है। वेद में विद्या की वृद्धि और अविद्या का नाशक करने पर बिशेष बल दिया गया है। यह बातें आर्य समाज के वैदिक पुरोहित विद्यानिधि आर्य ने रविवार को आर्य समाज मंदिर चपरी में सार्वजनिक रूप से आयोजित साप्ताहिक हवन यज्ञ और प्रवचन के दौरान कही। यह भी पढ़ें- शरणागत भक्त के योग-क्षेम का भार भगवान स्वयं उठाते हैं : जीयर स्वामीज्ञान का महत्व उन्होंने कहा कि अग्नि में हाथ डालने से हाथ जलता है। यही ज्ञान है। जन्म से हीं बच्चों को सुख और दुख की अनुभुति होने लगती है। क्या अच्छा है क्या खराब, बच्चों को उसकी मां सिखाती हैं। इसलिए ...