रांची, अप्रैल 30 -- रांची। वरीय संवाददाता केंद्र और राज्य की सरकारी नीतियों के कारण अब कर्मचारी संगठनों और उनके नेताओं के दबदबे में कमी आ रही है। पहले की तुलना में अभी राज्य में इन संगठनों की संख्या और नेताओं में वृद्धि हुई है, लेकिन अब श्रमिक संगठन में अरविंद नेताम, विंदेश्वरी दुबे जैसे दबंग लीडरों की कमी आ गयी है। राज्य में संगठनों के पास वैसा कोई नेता नहीं है, जिसके एक हुंकार पर सरकार भी कर्मचारियों की मांगों पर बात करने को विवश हो जाती थी। यह भी पढ़ें- मजदूर यूनियन का मजदूर सम्मान रैली आजश्रमिकों का विभाजन झारखंड राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष और इंटक के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अशोक सिंह ने इस मामले पर बताया कि सरकारी नीतियों के कारण श्रमिकों का विभाजन ही इसका सबसे बड़ा कारण है। पूर्व के जमाने में जब वामपंथी ट्रेड यूनियन, इंटक की यूनियन हु...