जमशेदपुर, मार्च 21 -- जमशेदपुर के सीतारामडेरा में सरहुल पर्व की शुरुआत एक अत्यंत श्रद्धामय परंपरा से हुई, जिसमें पाहन यानी पुजारी को उनके घर से ससम्मान कंधे पर बैठाकर सरना स्थल तक लाया गया। सरना स्थल पहुंचने पर पाहन के चरणों को धोकर उनका भव्य स्वागत किया गया, जिसके उपरांत उन्होंने मंत्रोच्चार के साथ पवित्र स्थल में प्रवेश किया। यह दृश्य न केवल गहरी आस्था का प्रतीक था, बल्कि समुदाय और प्रकृति के बीच के अटूट रिश्ते को भी दर्शा रहा था।मुख्य अनुष्ठान के प्रारंभ में सदियों पुरानी परंपरा का पालन करते हुए दो मिट्टी के घड़ों में रखे पानी का सूक्ष्म निरीक्षण किया गया। इस प्राचीन विधि के माध्यम से पाहन ने आगामी मानसून और वर्षा की स्थिति का पूर्वानुमान घोषित किया, जो कृषि आधारित जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। विधि-विधान से शुरू हुई इस प...