देवघर, मार्च 22 -- देवघर। चेटीचंड सिंधी समाज के अराध्य देव, मानवता, सत्य और समरसता के प्रतीक भगवान झूलेलाल जयंती चैत माह शुक्ल पद्व द्वितीया तिथि पर नववर्ष सह प्रमुख धार्मिक त्योहार मनाया गया। जानकारी दी गयी कि 10वीं शताब्दी में अखंड भारत के सिंध प्रांत में भगवान झूलेलाल का जन्म हुआ था। उन्हें भगवान विष्णु का वरुण अवतार माना जाता है। झूलेलाल के अवतरण दिवस को सिंधी समाज चेटीचंड का त्योहार नववर्ष के रुप में मनाता है। विद्वानों के अनुसार चैत माह की द्वितीया तिथि को एक बालक ने जन्म लिया था, जिसका नाम उडेरोलाल रखा गया। अपने चमत्कारों के कारण बाद में उन्हें झूलेलाल लालसाईं के नाम से सिंधी समाज पूजने लगा। चेटीचंड के दिन श्रद्धालु बहिराणा साहित बनाते हैं और शोभा यात्रा में छेज के साथ झूलेलाल की महिमा के गीत गाते हैं। साथ ही मीठे चावल, उबले नमकीन ...