मेरठ, मार्च 15 -- शैवाल अनुसंधान वर्तमान समय की जरुरत है। शैवाल से पर्यावरण संरक्षण एवं जैव संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा दिया जा सकता है। छात्र और शोधार्थी शैवाल के औषधीय एवं ऊर्जा के रास्ते तलाशें। दोनों ही क्षेत्रों में शैवाल की व्यापक संभावनाएं हैं। शैवाल का उपयोग भविष्य के ईंधन के रूप में हो सकता है। सीसीएसयू कैंपस स्थित बॉटनी विभाग में शैवाल पर जारी छह दिवसीय वर्कशॉप के समापन समारोह में उक्त बात पूर्व कुलपति प्रो.एचएस सिंह ने कही। प्रो.सिंह ने कहा कि शैवाल पर्यावरण संरक्षण में सहायक हैं। डॉ.आलोक मिश्रा ने कहा कि शैवाल का उपयोग विभिन्न न्यायिक जांचों में विशेष साक्ष्य के रूप में प्रयुक्त किया जा सकता है। डॉ.मिश्र के अनुसार जल से जुड़ी घटनाओं की जांच में शैवाल का अध्ययन उपयोगी सिद्ध होता है और इससे घटनाओं के वैज्ञानिक विश्लेषण में म...