नई दिल्ली, जून 22 -- वैदिक ज्योतिष में शुक्र को प्रेम, विवाह, सुख-सुविधा और आकर्षण का कारक ग्रह माना जाता है। वहीं केतु को ऐसा ग्रह माना जाता है जो कई बार व्यक्ति को उलझन, दूरी और अस्थिरता की ओर ले जाता है। ऐसे में जब शुक्र और केतु एक साथ आते हैं तो ज्योतिष में इस स्थिति को ज्यादा अच्छा नहीं माना जाता। ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र उपाध्याय का कहना है कि शुक्र और केतु का संयोग बनने पर सबसे ज्यादा असर रिश्तों और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में दिखाई दे सकता है। उनके मुताबिक इस दौरान प्रेम संबंधों में तनाव बढ़ सकता है। जो लोग पहले से रिश्तों में परेशानियों का सामना कर रहे हैं, उनके लिए स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। कई मामलों में गलतफहमियां बढ़ने से दूरियां भी पैदा हो सकती हैं। पंडित नरेंद्र उपाध्याय का कहना है कि पति-पत्नी के रिश्तों पर भी ...