नई दिल्ली, अप्रैल 8 -- सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अलग रह रहे दंपति के बीच करीब एक दशक से चल रहे झगड़े को 'वैवाहिक विवाद का महाभारत' बताते हुए, इस कानूनी जंग को पूरी तरह से खत्म कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस दंपति के बीच वैवाहिक संबंध खत्म हो चुका है और इसे बचाए रखने की कोई संभावना नहीं है, इसलिए शादी रद्द की जाती है। जस्टिस विक्रमनाथ और संदीप मेहता की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए दंपति के विवाह रद्द करने का आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने इस मामले में पति की तीखी आलोचना की, जो खुद पेशे से एक वकील है। उसने अपनी पत्नी, उसके परिवार और यहां तक कि उसके (महिला) वकील के खिलाफ 80 से अधिक कानूनी मामले दायर किए और एक बदले की भावना से भरा अभियान चलाया। जस्टिस मेहता द्वारा लिखे गए फैसले में कहा गया कि...