कुशीनगर, मई 10 -- कुशीनगर। नेबुआ नौरंगिया ब्लॉक क्षेत्र के देवतहां बाली के टोला कठहवा में आयोजित नौ दिवसीय विष्णु महायज्ञ के प्रथम दिन शनिवार को शिव-सती कथा का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा वाचक ने श्रद्धालुओं को सनातन धर्म के मूल तत्वों के बारे में भी जानकारी दी। पिपराइच से पधारे कथावाचक भैरव दास महराज ने कहा कि सनातन धर्म के सभी ग्रंथों में भगवान शिव और माता सती का विशेष महत्व है। शिव-सती कथा प्रेम, त्याग और आत्मसम्मान का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि कथा प्रसंग की शुरुआत राजा दक्ष प्रजापति द्वारा आयोजित यज्ञ से होती है, जिसमें भगवान शिव को जानबूझकर आमंत्रित नहीं किया गया था। कथा वाचक ने बताया कि अपने पति भगवान शिव के अपमान से आहत होकर माता सती यज्ञ स्थल पर पहुंचीं और वहीं आत्मदाह कर लिया। उन्होंने कहा कि देवी सती राजा दक्ष की पुत्री थीं।...