बलिया, फरवरी 23 -- रसड़ा, हिन्दुस्तान संवाद। क्षेत्र के सुल्तानीपुर गांव में आयोजित नौ दिवसीय सहस्रचंडी महायज्ञ के दूसरे दिन रविवार की रात अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचिका पं. गौरांगी गौरी ने शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि माता पार्वती की कठोर तपस्या के फलस्वरुप भगवान शिव ने उन्हें अपनी शक्ति के रूप में स्वीकार किया। यह विवाह केवल दो आत्माओं का नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि के कल्याण का दिव्य प्रसंग है। कथा में वर्णित था कि जब नंदी पर सवार भोलेनाथ भूत-पिशाचों के साथ बारात लेकर माता पार्वती के घर पहुंचे तो उनके माता-पिता अचंभित रह गए। परन्तु माता पार्वती ने प्रसन्नता पूर्वक शिव को पति के रूप में स्वीकार किया। भगवान शिव व माता पार्वती के विवाह में देवता, असुर, पशु-पक्षी आदि शामिल हुए। सभी ने आनंदपूर्वक बाराती बनकर उत...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.