सिद्धार्थ, फरवरी 3 -- सोहना, हिन्दुस्तान संवाद। भनवापुर क्षेत्र के बुढ़़ऊ चौराहे पर आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय श्रीरामकथा के तीसरे दिन रविवार रात कथावाचिका कनकेश्वरी देवी ने शिव-पार्वती विवाह के प्रसंग का वर्णन किया। इसे सुनकर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। उन्होंने कहा कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की। वर्षों तक किए गए तप, संयम और अडिग आस्था से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने विवाह के लिए स्वीकृति दी। उन्होंने कहा कि शिव-पार्वती विवाह केवल एक पौराणिक कथा नहीं है, बल्कि यह त्याग, विश्वास, धैर्य और समर्पण का आदर्श उदाहरण है। यह प्रसंग गृहस्थ जीवन में संयम, परस्पर सम्मान और कर्तव्य बोध की प्रेरणा देता है। कथा के दौरान भजनों और संगीतमय प्रस्तुति ने माहौल को और भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु कथा के भाव मे...