नई दिल्ली, जनवरी 31 -- प्रेमानंद महाराज के विचार भक्तों की समस्याओं का समाधान करने में मदद करते हैं। यही वजह है कि व्यक्ति अपनी बड़ी से बड़ी परेशानी या मन में आई दुविधाओं का समाधान जानने के लिए प्रेमानंद महाराज की शरण में जाते हैं। एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज जी से पूछा कि मैं भगवान शिव की भक्त हू्ं, वो वैरागी हैं। ऐसे में अगर उनसे अच्छा, घर और गाड़ी या पैसे कमाने की इच्छा करती हूं, तो मैं गलत तो नहीं हूं। चलिए जानते हैं कि प्रेमानंद महाराज ने क्या जवाब दिया। प्रेमानंद महाराज जी कहते हैं कि रावण को लंका किसने दी थी, वैरागी ने तो दी थी। उनके मित्र है कुबेर, जो उनके चरण सेवक है। भगवान शंकर का सख्य भाव स्वीकार करते हैं कुबेर, तो त्रिभुवन को धनी बना दिया। महाराज जी कहते हैं कि कई बार कैलाश को उठाकर अपनी भुजाओं से भगवान शिव को प्रसन्न कर लिया।...
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