नई दिल्ली, अगस्त 12 -- नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि उसे पहले यह देखना होगा कि 'क्या शिवसेना में कोई विभाजन हुआ है क्योंकि ऐसा विभाजन पार्टी के विधायी दल से शुरू हो सकता है और संगठन तथा प्राथमिक सदस्यता तक फैल सकता है। शीर्ष अदालत ने भारत के निर्वाचन आयोग के फैसले के खिलाफ शिवसेना (यूबीटी) गुट की ओर से दाखिल याचिकाओं पर चल रही अंतिम बहस के दौरान यह टिप्पणी की। शिवसेना (यूबीटी) गुट ने निर्वाचन आयोग के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट को असली शिवसेना घोषित करने के साथ ही पार्टी का नाम तथा चुनाव चिन्ह 'धनुष-बाण' भी उन्हें दे दिया गया था। यह भी पढ़ें- विधायक दल में टूट से पार्टी में बंटवारा नहीं : शिवसेना (यूबीटी)कानूनी बहस मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉय...