बगहा, मार्च 21 -- बेतिया, हमारे संवाददाता। ईद का मुबारक अवसर इस बार शिया समुदाय के लिए एक गहरा भावनात्मक असर लेकर आया। मस्जिदों में जहां एक ओर ईद की नमाज़ अदा की गई, वहीं दूसरी ओर पूरे माहौल में सादगी और ग़म की झलक साफ़ तौर पर महसूस की गई। खुशी के इस मौके पर भी लोगों के दिल अपने रहबर की याद से भरे हुए नजर आए। नमाज़ के बाद मौलाना मनतशा अली हसन ने अपने ख़ुत्बे में कहा कि ईद महज़ खुशियां मनाने का दिन नहीं, बल्कि यह दिन इंसान को अल्लाह की याद, तक़वा, सब्र और इंसानियत के रास्ते पर चलने की सीख देता है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आज के दौर में सबसे बड़ी ज़रूरत यह है कि इंसान अपने अंदर सच्चाई, सब्र और एकता को मजबूत करे। मौलाना ने यह भी कहा कि हमारी इबादतें तभी मायने रखती हैं जब वे ख़ालिस नियत के साथ अदा की जाएं, और हमें अल्लाह से उनकी कबूलियत की दुआ भ...