संभल, जुलाई 25 -- दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के धरना-प्रदर्शन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर को लेकर शनिवार को राजनीतिक सरगर्मी तेज रही। भाजपा, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस के जिला अध्यक्षों ने इस घटनाक्रम पर अपनी-अपनी राजनीतिक सोच के अनुरूप प्रतिक्रियाएं दीं। सत्ता पक्ष ने इसे सरकार की जवाबदेही और लोकतांत्रिक परंपरा से जोड़ा। जबकि विपक्षी दलों ने इसे छात्रों के संघर्ष और जनदबाव की जीत बताया। पूरे दिन राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर चर्चा होती रही और अलग-अलग दलों के नेताओं ने शिक्षा व्यवस्था, छात्रों के हित और सरकार की नीतियों को लेकर अपनी बात रखी। यह लाखों छात्र-छात्राओं की संघर्ष का नतीजा है। देश के 38 करोड़ छात्र-छात्राओं के सत्य की जीत हुई है। देश में पेपर लीक होना एक गंभीर वि...