भदोही, मार्च 24 -- भदोही, संवाददाता। पूर्वांचल समेत कालीन नगरी में माध्यमिक शिक्षा की रीढ़ वित्त विहीन शिक्षक हैं। उनके बिना अच्छी शिक्षा, सुचिता संग परीक्षा, कापियों का मूल्यांकन आदि कार्य संभव नहीं है। लेकिन लगातार उनकी अनदेखी करने का काम सरकारें कर रही हैं। नाम मात्र के मानदेय में वह बच्चों का भविष्य संवारने का काम कर रहे हैं। बता दें कि जनपद के सरकारी स्कूलों में गुरुजनों की कमी है। साथ ही उनकी संख्या भी काफी कम है। ऐसे में विद्यार्थियों के भारी दबाव को झेलना उनके बस की बात नहीं है। जनपद में संचालित बड़ी संख्या में इंटरमीडिएट एवं हाईस्कूल कालेजों में वित्त विहीन गुरुजन पढ़ाने का काम करते हैं। उनके बिना शिक्षा की कल्पना आज के समय में करना मुश्किल है। लेकिन उन्हें वेतन और सुविधाओं के नाम पर कहीं पर पांच हजार तो कहीं पर मात्र 10 हजार रुप...
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