नई दिल्ली, मई 30 -- पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो क्लिप कथित रूप से 'रीट्वीट' करने के मामले में शिक्षाविद् मधु पूर्णिमा किश्वर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति अमन चौधरी की पीठ ने कहा कि 'रचनात्मक आलोचना करने और ट्रोल करने' के बीच अंतर है। अदालत ने कहा कि किश्वर के सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में फॉलोअर हैं, इसलिए इसके परिणाम व्यापक हो सकते हैं। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह कोई 'अकेली घटना' नहीं है और किश्वर पहले भी 'संवेदनशील' मुद्दों पर पोस्ट साझा करती रही हैं। चंडीगढ़ पुलिस ने किश्वर के खिलाफ मामला दर्ज किया था। यह भी पढ़ें- VIDEO: अब सड़कों पर उतरी 'कॉकरोच जनता पार्टी'! सोशल मीडिया पर शुरू हुई अनोखी जंग किश्वर ने अपने वकीलों कपिल सिब्बल और सरताज सिंह नरूला के माध्यम से दलील दी कि उनके खिलाफ क...