शामली, मई 30 -- शामली। शहर के जैन धर्मशाला में आयोजित प्रवचन सभा में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर मुनिराज ने कहा कि शिक्षा, संस्कार और आत्मसंयम ही जीवन के वास्तविक विकास का आधार हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान आधुनिक युग में शिक्षा को सफलता का प्रमुख माध्यम माना जाता है, लेकिन शिक्षा तभी सार्थक है जब उसके साथ नैतिक मूल्य और संस्कार भी जुड़े हों। आचार्य श्री ने कहा कि प्रत्येक माता-पिता की इच्छा होती है कि उनके बच्चे शिक्षित होकर उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करें। बेटा और बेटी दोनों को समान अवसर देकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना समय की आवश्यकता है। शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि व्यक्ति के चरित्र, व्यक्तित्व और संस्कारों का निर्माण करने वाली शक्ति है। यह भी पढ़ें- सुलेख व्यक्ति के व्यक्तित्व को निखारता है- शिवकुमार शर्मा ...