नई दिल्ली, अक्टूबर 23 -- सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा कि दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) द्वारा पुरुष और महिला शिक्षकों के लिए अलग-अलग रिक्तियां जारी करने का कानूनी आधार क्या है। साथ ही, कोर्ट ने यह भी जानना चाहा है कि सरकारी नौकरियों में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को कैसे शामिल किया जाएगा। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने 16 अक्तूबर के अपने आदेश में, जेन कौशिक और प्रवीण सिंह द्वारा दायर याचिकाओं के आधार पर छह सवाल तय किए हैं। कोर्ट ने सरकार को 15 दिनों में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि हमारे सामने मुख्य मुद्दा यह है कि प्रतिवादी राज्य द्वारा जारी रिक्तियों की अधिसूचनाओं में 'थर्ड जेंडर' (ट्रांसजेंडर) को शामिल नहीं किया गया है।सुप्रीम कोर्ट ने सरकार...