मुजफ्फरपुर, जनवरी 25 -- मुजफ्फरपुर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि सहवाजपुर, ब्रह्मस्थान में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन आचार्य वेदानंद शास्त्री आनंद ने कहा कि शाश्वत संबंध सिर्फ भगवान से ही बन सकता है। यह महापुराण श्रीकृष्ण का वांग्मय स्वरूप है। इसका पाठ, श्रवण व चिंतन बहुआयामी फल देने वाला है। उन्होंने आगे की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान ने निश्छल प्रेम के प्रति समर्पण विदुर जी के यहां रूखा-सूखा भोजन किया और दुर्योधन के राजसी भोजन को त्याग दिया। इसके बाद आचार्य ने भगवान के अवतार की चर्चा की।

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