रांची, जनवरी 14 -- रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि विवाह से पहले उम्र और आपराधिक पृष्ठभूमि जैसे महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाना पति के साथ मानसिक क्रूरता के दायरे में आता है और ऐसे हालात में वैवाहिक संबंध निभाना संभव नहीं है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस एके राय की अदालत ने इस निर्देश के साथ तलाक के खिलाफ पत्नी की अपील याचिका खारिज कर दी और फैमिली कोर्ट के तलाक दिए जाने के आदेश को बरकरार रखा। हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट का निर्णय न तो मनमाना है और न ही साक्ष्यों के विपरीत। अदालत ने स्पष्ट किया कि विवाह विश्वास पर आधारित होता है और यदि शुरुआत में ही महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया जाए, तो यह मानसिक क्रूरता मानी जाएगी। फैमिली कोर्ट के आदेश में किसी प्रकार के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। मामला ...