नई दिल्ली, जुलाई 31 -- सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि अनुकंपा के आधार पर शादीशुदा बेटी भी नौकरी पाने की हकदार है। शीर्ष अदालत ने अनुकंपा के आधार पर शादीशुदा बेटी को नौकरी के लिए अयोग्य मानने की नीति को रद्द करते हुए यह फैसला दिया है। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने के लिए तलाकशुदा या पति द्वारा छोड़ी गई बेटियों को ही योग्य मानने ​​और शादीशुदा बेटियों को अयोग्य मानने की सरकार की नीति पूरी तरह से गलत है और यह समानता के अधिकार का हनन करता है। शीर्ष अदालत ने फैसले में कहा कि सरकार की नीति में बेटा-बेटियों के बीच इस तरह का वर्गीकरण असंवैधानिक है और संविधान के अनुच्छेद-14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है। पीठ ने अपने फैसले मे...