नई दिल्ली, अप्रैल 4 -- दक्षिण एशिया की राजनीति में चीन एक बार फिर बिचौलिये की भूमिका में नजर आ रहा है। साल 2021 में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच उपजे सबसे भीषण तनाव को कम करने के लिए चीन में त्रिपक्षीय वार्ता का दौर शुरू हो गया है। हालांकि, कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि चीन की इस उदारता के पीछे शांति से कहीं अधिक अपने सुरक्षा हित और काबुल में भारत के बढ़ते प्रभाव को रोकने की मंशा छिपी है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने शुक्रवार को पुष्टि की कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बातचीत स्थिरता के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा, "चीन, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच एक सहमति बन गई है। दोनों देश चीन की मध्यस्थता का स्वागत कर रहे हैं और फिर से मेज पर बैठने को तैयार हैं, जो एक सकारात्मक वि...