शहादत दिवस पर याद आए धरती आबा, लेकिन उलिहातू की समस्याएं अब भी बरकरार
रांची, जून 8 -- अड़की, प्रतिनिधि। नौ जून झारखंड के महानायक अमर शहीद भगवान बिरसा मुंडा का शहादत दिवस है। वर्ष 1900 में इसी दिन रांची जेल में उनकी मृत्यु हुई थी। मात्र 25 वर्ष की आयु में अंग्रेजों के खिलाफ महाउलगुलान का नेतृत्व करने वाले धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा का पैतृक गांव उलिहातू आज भी कई बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है। भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलिहातू और इसके आसपास के गांवों में पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। बाड़ीनिजकेल पंचायत के तुबिद, बेड़ाडीह, जोपनो, लेपसेर, सेल्दा, गसार, पीड़िटोली और कुईल गांवों के ग्रामीण पानी की समस्या से परेशान हैं। गर्मी के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है तथा लोगों को दूर-दराज के जलस्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है। यह भी पढ़ें- श्रद्धा के केंद्र उलिहातू में 126वीं शहादत दिवस की तैयारियां पूरी...
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