गोंडा, जून 22 -- गोण्डा। शहर के इमाम बारगाह हुसैनिया रकाबगंज में पांचवी मोहर्रम पर मजलिसों में कर्बला में हुई शहादत का मंजर बयां किया गया। इसे सुन अजादारों की आंखें नम हो गई। इसमें बड़ी संख्या में अजादारों ने शिरकत कर वाकया-ए-कर्बला को याद किया। मजलिस को खिताब करते हुए आलिम-ए-दीन ने कर्बला के शहीदों की कुर्बानी और इमाम हुसैन के पैगाम पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि हजरत इमाम-ए-हुसैन मुल्क या हुकूमत के लिए जंग नहीं की,बल्कि वह इंसानों के सोए हुए जेहन को जगाने आए थे। उनके कुनबे में शामिल बूढ़े, जवान, बच्चे और महिलाओं ने खुद पर जुल्म सहन कर लिया लेकिन नाना के मजहब को जालिम यजीद से बचा लिया। यह भी पढ़ें- अलम और ताबूत का जुलूस बरामद हुआ मजलिस के दौरान अज़ादारों की आंखों अश्कबार रहीं। नौहा-ख़्वानी के साथ शहीदाने कर्बला को खिराजे अकीदत पेश किया गय...