समस्तीपुर, मार्च 14 -- पुस्तकें मानव जीवन के शक्तिशाली संसाधन हैं। यह हमें खुद को समझने का अवसर प्रदान कर हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाती हैं। इसकी अनदेखी कर वर्तमान युवा पीढ़ी पुस्तक संस्कृत से विमुख हो रही है। यह संपूर्ण राष्ट्र और विश्व के लिए चिंता की बात है। पुस्तकालयों में पुस्तकों का साम्राज्य होता है,जो समाज की नींव गढ़ता है। आधुनिक युग में पुस्तकों का ई. संस्करण एवं ई.पुस्तकालय का जाल बढ़ता जा रहा है। विषयों की जानकारी के लिए अब गूगल जैसे सोशल साइट्स का तीव्रतर उपयोग हो रहा है। यह विषयों की गहराई के लिए कभी पुस्तकों का विकल्प नहीं हो सकता है। धीरे धीरे समृद्ध लाइब्रेरी समाप्त होने के कगार पर है। बोले अभियान के तहत लोगों ने इस विषय पर अपनी बात रखीं। अरूण कुमार सिंह ने कहा कि पुस्तकों को अपना साथी बनाएं। यह आपके जीवन को सफल बना देगा। प...