शाहजहांपुर, मार्च 26 -- शाहजहांपुर, संवाददाता। 1972 में तत्कालीन पालिका चेयरमैन वासुदेव शरण गुप्ता द्वारा स्थापित नगरनिगम प्रांगण की अमर शहीदों की प्रतिमाएं शहर की लोक संस्कृति का केंद्र थीं। यह शहर की समाजिक राजनीतिक चेतना को एक साथ जोड़ती थीं। इतिहासकार डॉ. विकास खुराना बताते हैं कि राष्ट्रीय त्यौहारों के अवसर पर शहर के युवा इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाते हुए इन्हीं प्रतिमाओं पर फूलों की मालाएं सजाते थे।अनेक शामें यहां मोमबत्तियों से प्रकाशित की गई। आज की अनेक पीढ़ियां इन्हीं मूर्तियों को देखकर बड़ी हुई और युवा पीढ़ी में गौरव का संचार हुआ।काकोरी शहीदों की इन प्रतिमाओं के प्रति युवा भावनाओं का परीक्षण न केवल अनेक किताबों में उल्लेखित है बल्कि कार्टून और डूडल जैसी विधाओं में भी यह शाहजहांपुर का प्रतिनिधित्व करती रहीं।

हिंदी हिन्दुस्तान की...