नई दिल्ली, सितम्बर 21 -- जमुई, बिहार में एक नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ की जितनी निंदा की जाए, वह कम है। शनिवार रात की इस शर्मनाक घटना से अनेक सवाल खड़े हुए हैं, जिनके जवाब हर किसी को सोचने चाहिए। क्या लड़कियां इतनी असुरक्षित हैं कि उन्हें शाम ढलने के बाद घर से बाहर नहीं रहना चाहिए? क्या अपराधियों में भय समाप्त हो गया है? वैसे, इस मामले में गिरफ्तारियां हुई हैं और जांच भी जारी है। किसी भी दोषी को छोड़ना नहीं चाहिए और उन्हें ऐसी सजा मिलनी चाहिए, जो सबके लिए सबक बन जाए। एक सवाल यह भी है कि सुधार का काम केवल कानून करेगा या समाज की भी इसमें भूमिका होनी चाहिए? समाज के एक बड़े हिस्से में उदासीनता बढ़ रही है और लापरवाही भी। आपराधिक मानसिकता के लोग सोचने लगे हैं कि वे अपराध करके बच जाएंगे। जमुई की घटना की मिसाल लें, तो यहां पीड़ितो...