बिजनौर, मार्च 30 -- नहटौर। सतपुरुष बाबा फुलसंदे वालो ने कहा कि परमेश्वर से विमुख मन इंद्रियों में भटकता रहता है। मन इंद्रियों को तृष्णा और वासना की ओर ले जाता है। जिससे जीवन का पतन हो जाता है। हमारा शरीर ही अनंत ब्रह्मांड का सूक्ष्म नक्शा है। अभिमान भोग तृष्णा का त्याग करके मनुष्य बंधनों से छूट जाता है। रविवार को गुरु गद्दी दरबार फुलसंदा स्थित आश्रम में सतपुरुष बाबा फुलसंदे वाले अपना प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा अभिमान और भोग, तृष्णा के कारण जीव मरण बंधन में फंसा हुआ है। जो परमेश्वर का नाम जपते हैं उनको कुछ कमी नहीं रहती है। उनके सब दुख दूर हो जाते हैं उन्होंने बताया कि तीन तरह की आत्माएं होती हैं। सतोगुणी, रजोगुणी, तमोगुण ,जिनके बारे में उन्होंने विस्तार से बताया।तृष्णा के कारण जीवन पतन की ओर जाता है और शरीर नष्ट हो जाता है। हमारी बुद्...