शामली, मई 14 -- थानाभवन। मंदिर श्री शंभूपुरी में श्री सनातन शिव शक्ति हनुमान मंडल के तत्वाधान में आयोजित साप्ताहिक सत्संग में प्रवचन करते हुए कथावाचक राज राजेश्वर महाराज ने कहा शरीर नाशवान है शरीर में जब तक शक्ति नहीं होगी वह शव के समतुल्य है । शिव और शक्ति के मिलन से ही क्रिया, गति और सृजन संभव है। जब तक ऊर्जा में चेतना का संचार नहीं होता, वह अज्ञानी, अव्यवस्थित, लक्ष्यहीन और अंधी रहती है। ऊर्जा अकेले कुछ भी उत्पन्न नहीं कर सकती,चेतना ही उसे सार, रूप और दिशा प्रदान करती है।

जीवन के सुख और दुख महाराज ने कहा जीवन में सुख और दुख, दोनों ही हमारी यात्रा के महत्वपूर्ण अंग हैं। कोई भी ऐसा इंसान नहीं है जिसने केवल सुख देखा हो या केवल दुख झेला हो। ये दोनों ही अनुभव जीवन को संतुलित करते हैं और हमें जीवन के गहरे अर्थ को समझने का अवसर देते हैं। दुख...