शामली, अप्रैल 9 -- थानाभवन। नगर के मौहल्ला खेल के सांब सदा शिव मंदिर प्रांगण मे श्री सनातन शिव शक्ति हनुमान मंडल द्वारा आयोजित साप्ताहिक सत्संग में प्रवचन करते हुए कथा वाचक राज राजेश्वर महाराज ने कहा यह शरीर नाशवान है अतः इस शरीर से अधिक से अधिक प्रभु चिंतन कर पुण्य रूपी धन अर्जन करे। हनुमान और राम का आध्यात्मिक संबंध अहंकार के विसर्जन और परम समर्पण का प्रतीक है। हनुमान जी शिव के अंशावतार स्वयं ज्ञान-शक्ति के भंडार होकर भी, स्वयं को राम का दास मानकर नि:स्वार्थ सेवा करते हैं, जो यह दर्शाता है कि ईश्वर की प्राप्ति ज्ञान से अधिक प्रेम और समर्पण से होती है। हनुमान जी निष्काम सेवा बिना फल की इच्छा के प्रतीक हैं। उनका पूरा जीवन श्री राम को समर्पित था, जो भक्ति की पराकाष्ठा है।अत्यंत शक्तिशाली ,शिव के अंश होने के बावजूद, हनुमान जी ने कभी अपनी शक...