गाजीपुर, फरवरी 8 -- देवकली। क्षेत्र के ग्राम जेवल स्थित खेल मैदान में जयगुरुदेव जनजागरण यात्रा के दौरान आयोजित सत्संग में संत पंकज महाराज ने कहा कि संत, महात्मा और फकीर अत्यंत दयालु होते हैं। जिस प्रकार विद्यार्थी पढ़ाई के लिए विद्यालय जाते हैं, उसी प्रकार संतों का सत्संग आध्यात्मिक पाठशाला है। उन्होंने कहा कि गृहस्थ आश्रम में रहकर ईमानदारी से परिश्रम करते हुए परिवार का पालन-पोषण करना चाहिए और साथ ही थोड़ा समय भगवान के भजन में भी लगाना चाहिए। संत पंकज महाराज ने भजन के वास्तविक स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गाना-बजाना, ढोल-मंजीरा भजन नहीं बल्कि उसकी नकल है। भजन वह है जो प्रभु लोक से आने वाली अनहद वाणी और आकाशवाणी को आत्मा के तीसरे कान से सुनने से होता है। उन्होंने संत कबीर के वचनों का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी शब्द साधना के माध्यम से ...
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