किशनगंज, मार्च 24 -- किशनगंज। संवाददाता टीबी (क्षय रोग) आज भी हमारे समाज में केवल एक संक्रामक बीमारी भर नहीं है, बल्कि यह सामाजिक भय, भ्रांतियों और उपेक्षा का प्रतीक बन चुकी है। अक्सर देखा जाता है कि लोग महीनों तक चलने वाली खांसी, कमजोरी, बुखार या वजन कम होने जैसे लक्षणों को साधारण बीमारी समझकर अनदेखा करते रहते हैं। जब तक स्थिति गंभीर नहीं हो जाती, तब तक जांच कराने की पहल नहीं की जाती। इसके साथ ही, समाज में फैली गलत धारणाएं-जैसे टीबी का लाइलाज होना, मरीज से दूरी बनाना या उसे अलग-थलग कर देना-रोग से अधिक पीड़ा देने लगती हैं। परिणामस्वरूप, मरीज मानसिक रूप से टूट जाता है और समय पर इलाज नहीं मिल पाता। जबकि सच्चाई यह है कि आज के दौर में टीबी पूरी तरह से ठीक होने वाली बीमारी है। सरकार द्वारा नि:शुल्क जांच, दवा, पोषण सहायता और नियमित निगरानी की मज...
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