नई दिल्ली, अक्टूबर 27 -- ज्योतिष शास्त्र में शनि को न्याय और कर्मफल का कारक माना जाता है। मान्यता है कि शनि की साढ़ेसाती के दौरान व्यक्ति को जीवन में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। कभी काम में देरी होती है, तो कभी आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जिम्मेदारियां चिंता बढ़ा देती हैं। हालांकि, इस अवधि को केवल परेशानियों से जोड़कर नहीं देखा जाता। इसे धैर्य, अनुशासन और अपनी गलतियों से सीखने का समय भी माना जाता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, साढ़ेसाती लगभग साढ़े सात साल की अवधि होती है। यह जन्म के समय चंद्रमा की राशि से बारहवीं, पहली और दूसरी राशि में शनि के गोचर से जुड़ी होती है। जब शनि इस आखिरी राशि से आगे बढ़ जाते हैं, तो साढ़ेसाती का दौर समाप्त माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इसके बाद जीवन के कुछ क्षेत्रों में राहत और ब...