नवादा, मार्च 25 -- नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता। सीमाओं से दूर नवादा की गलियों और चौक-चौराहों पर भी जंग की तपिश महसूस की जा रही है। भले ही इक्का-दुक्का दुकानें ही इस परिस्थिति में बंद हुई हैं और ज्यादातर दुकानें जैसे-तैसे कर चलायी जा रही हैं, लेकिन फजीहत यह है कि कमर्शियल गैस सिलेंडर की किल्लत ने छोटे दुकानदारों की कमर तोड़ दी है। जो चाय और नाश्ते की दुकानें कभी नीली लौ पर चमकती थीं, आज वहां कोयले और लकड़ी का काला धुआं आंखों में चुभ रहा है। ​नवादा के प्रमुख चौक-चौराहों पर सुबह की रौनक अब धुएं के गुबार के पीछे छिपी है। कमर्शियल गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत और आसमान छूती कीमतों ने जिले के चाय, नाश्ता और छोटे ढाबा संचालकों को दशकों पीछे धकेल दिया है। दुकानदार कहते हैं कि दुकान बंद करना विकल्प नहीं है, क्योंकि पेट का सवाल है, लेकिन लकड़ी-कोयले प...