वाराणसी, जून 30 -- वाराणसी। बीएचयू के 'पुलिया प्रसंग' में मंगलवार को हिंदी के प्रख्यात कवि नागार्जुन की 115वीं जयंती पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। सत्र की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि और आचार्य प्रो. श्रीप्रकाश शुक्ल ने कहा कि नागार्जुन व्यामोह मुक्त कवि थे, जिनकी संवेदना का द्वार हमेशा खुला हुआ था। यही कारण है कि उनके यहां प्रेम से प्रकृति और परंपरा से आधुनिकता तक के अनेक आयाम मिलते हैं। प्रो. शुक्ल ने कहा कि नागार्जुन निरंतर जागरूक करने वाले सामाजिक चेतना के कवि हैं जो प्रतिबद्ध हैं, आबद्ध हैं और संबद्ध भी हैं। मुख्य वक्ता प्रयागराज से आए युवा कवि डॉ. अमरजीत राम ने नागार्जुन की रचना प्रक्रिया पर कहा कि उनके यहां उपेक्षितों के प्रति गहरी सहानुभूति है। यह भी पढ़ें- Muzaffarpur News जनचेतना के प्रखर संवाहक थे नागार्जुन : चंद्र उनके चरित्...