आयशा अरविंद | नई दिल्ली, नवम्बर 6 -- UPI से भुगतान करने वाले कारोबारियों को हमेशा मुफ्त लेनदेन की सुविधा देने का कोई वादा नहीं किया गया था। केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में यह दलील दी। इसके साथ ही सरकार ने 2,000 रुपये से अधिक के कुछ UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के प्रस्ताव का बचाव किया है। केंद्र ने चार नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाबी हलफनामे में कहा कि MDR की संशोधित व्यवस्था पर इसे लागू करने से काफी पहले विचार शुरू हो गया था। इस व्यवस्था को अंतिम रूप देने से पहले संबंधित पक्षों से भी चर्चा की गई थी। सरकार ने कहा कि कारोबारियों को लगातार शून्य MDR व्यवस्था जारी रखने का कोई विशेष आश्वासन नहीं दिया गया था। साथ ही, इस व्यवस्था के लिए सरकार की ओर से दी जाने वाली सब्सिडी अनिवार्य नहीं, बल्कि सरकार के...